समाजशास्त्र के मूलतत्त्व

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Product Specifications

Publisher PHI Learning All M.A - Master of Arts books by PHI Learning
ISBN 9788120344495
Author: J. P. Singh
Number of Pages 171
Available
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समाजशास्त्र के मूलतत्त्व - Page 1 समाजशास्त्र के मूलतत्त्व - Page 2 समाजशास्त्र के मूलतत्त्व - Page 3 समाजशास्त्र के मूलतत्त्व - Page 4 समाजशास्त्र के मूलतत्त्व - Page 5

समाजशास्त्र के मूलतत्त्व by J. P. Singh
Book Summary:

शविभिन्न भारतीय विश्वविद्यालयों के समाजशास्त्र विषय के स्नातक स्तर के विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इसकी रचना एक स्तरीय पाठ्य-पुस्तक के रूप में की गयी है | इस पुस्तक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि विद्यार्थियों को समाजशास्त्र के नवीनतम तथ्यों की जानकारी मिले तथा इस बात की पूरी कोशिश की गयी है कि अंग्रेज़ी माध्यम से अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की तुलना में हिन्दी माध्यम से पठन-पाठन करने वाले विद्यार्थी ज्ञान की दृष्टि से पिछे नहीं रहें | अंग्रेज़ी भाषा में लिखी गयी नवीनतम उच्च-स्तरीय पुस्तकों को आधार मानकर विभिन्न प्रकार के समाजशास्त्रीय तथ्यों को एक जगह इकठ्ठा कर एक मौलिक ढंग से विश्लेषन करने का इस पुस्तक में पूरा प्रयास किया गया है |

इस विषय पर प्रमुख विद्वानों के विचारों को समेटकर सिलसिलेवार ढंग से रखने का भरपूर प्रयास किया गया है | एक ही विषय पर भिन्न-भिन्न लेखकों के भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण हैं | उन तमाम अहम् विचारों को काफ़ी हद तक शामिल करने का प्रयास किया गया है | सम्बद्ध समाजशास्त्रीय अवधारणाओं का प्रामाणिक अनुवाद और उनके विश्लेषन के साथ-साथ पाश्चात्य विद्वानों के नामों का भी प्रामाणिक उच्चारण इस पुस्तक की अपनी विशिष्टता है |

Audience of the Book :
This book Useful for Sociology
Table of Contents:

1. समाजशास्त्र का स्वरूप, क्षेत्र या विषय-वस्तु एवं विकास, समाजशास्त्र की उपयोगिता एवं अन्य समाज विज्ञानो के साथ उसका सम्बन्ध |

2. सामाजिक समूह | 

3. परिवार |

4. समाजीकरण |

5. सामाजिक संरचना तथा प्रकार्य |

6. संस्कृति |

7. सामाजिक गतिशीलता |

8. सामाजिक नियन्त्रण |

9. सामाजिक परिवर्तन |

10. सामाजिक परिवर्तन के सिद्धान्त |

11. सामाजिक स्तरण |

मिश्रित वस्तुनिष्ठ प्रश्‍न 

परिशिष्ट 

लेखक के नामों की सूचीपारिभाषिक शब्दावली

विशिष्ट सन्दर्भ-ग्रन्थ

 

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