अनुसंधान : एक विवेचन

By डॉ. ओंमप्रकाश शर्मा more
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Product Specifications

Publisher Nirali Prakashan All M.A - Master of Arts books by Nirali Prakashan
ISBN 9789351646815
Author: डॉ. ओंमप्रकाश शर्मा
Number of Pages 137
Edition Second Edition
Available
Available in all digital devices
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अनुसंधान : एक विवेचन - Page 1 अनुसंधान : एक विवेचन - Page 2 अनुसंधान : एक विवेचन - Page 3 अनुसंधान : एक विवेचन - Page 4 अनुसंधान : एक विवेचन - Page 5

अनुसंधान : एक विवेचन by डॉ. ओंमप्रकाश शर्मा
Book Summary:

मानव बुद्धिसम्पन्न प्राणी होने के कारण अपनी सचेतावस्था से ही जिज्ञासु रहा है । वह अहम्‌ (आत्मा), 'इदम्‌' (जगत) और 'सः' (परमात्मा) को जानना चाहता है । जगत में वह क्यों है ? जगत्‌ ही क्यों है ? मुझे और जगत को यहाँ लाने वाला कौन है ? मेरा और जगत का पारस्परिक संबंध क्या है ? आदि प्रश्न मानव के मानस को झकझोरते है । उसकी ज्ञान-पिपासा कभी तृप्त नहीं होती । अनुसंधान के लिए विभिन्न क्षेत्रो में गुंजाइश पाई जाती है । और आरंभ हो जाती है यात्रा ज्ञात से अज्ञात की ओर ।

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय ने द्वितीय वर्ष एम.ए.के. पाठ्यक्रम में “अनुसंधान प्रक्रियाः स्वरूप और क्षेत्र नामक पाठ्यक्रम का समावेश किया । साथ ही आबासाहेब गरवारे महाविद्यालय में एम.फिल. तथा पीएच. डी. का अनुसंधान केंद्र जारी है । पिछले कई वर्षा से शोध मार्गदर्शक के रूप में कार्यरत होने से मुझे “अनुसंधान' विषय पर किताब लिखने की प्रेरणा मिली ।

अनुसंधान का अपना एक दर्शन होता है, एक विज्ञान होता है और एक कला होती है । शोध-दर्शन अनुसंधाता को सम्यक्‌ दर्शन (विजन) देता है । शोध-विज्ञान विवेकपूर्ण संतुलित निर्णय के लिए उसे समर्थ बनाता है । शोध-कला अनुसंधाता के शोधप्रबंध को सर्वांगीण सौंदर्य दृष्टि प्रदान करती है । इन तीनों के विविध पहलुओं के समन्वय से अनुसंधान उच्च स्तर का हो सकता है ।

अनुसंधान उस प्रक्रिया का नाम है जिसमें बोधपूर्वक प्रयत्न से तथ्यों का संकलन कर सूक्ष्मग्राही एवं विवेचक बुद्धि से उनका अवलोकन-विश्लेषण करके नए तथ्यों या सिद्धांतों का उद्घाटन किया जाता है । अनुसंधान का एक अनिवार्य लक्ष्य यह होता है कि ज्ञान-क्षेत्र को अधिक विस्तार देने वाले किसी नए तथ्य या सत्य का उद्घाटन हो ।

Audience of the Book :
This book Useful for Arts Students.

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