योग्यताएं - एस्ट्रोनॉट बनने के लिए इंजीनियरिंग, बायोलॉजिकल साइंस, फिजिकल साइंस, कंप्यूटर साइंस या गणित में बैचलर डिग्री होनी चाहिए. तीन साल का प्रोफेशनल अनुभव होना चाहिए (या फिर जेट विमान में 1,000 घंटे का पायलट-इन-कमांड का अनुभव)
अगर ये सारी योग्यताएं आपके पास हैं तो आपको नासा की एस्ट्रोनॉट फिजिकल परीक्षा पास करनी होगी. जिसमे - स्कूबा डाइविंग, फॉरेस्ट रिलेटेड एक्सपेरिएन्स, नेतृत्व का अनुभव, भाषाओं का ज्ञान विशेषकर रूसी भाषा का ज्ञान आदि.
एस्ट्रोनॉट की क्लास - अब तक नासा की तरफ से एस्ट्रोनॉट्स के लिए 22 कक्षाओं का चयन किया जा चुका है. प्रशिक्षण से संबंधित कई तरह के बदलाव किये गए हैं.
एस्ट्रोनॉट द्वारा इस्तेमाल होने वाले वाहन- एस्ट्रोनॉट्स की नई कक्षा में बहुत से वाहन होते हैं. इन वाहनों का पूरा प्रशिक्षण कराया जाता है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने के लिए सोयूज स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है.
नए प्रशिक्षित एस्ट्रोनॉट सबसे पहले कहां जाते हैं - शुरुआत में इन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक भेज जाता हैं या फिर और ऊंचाई तक. नासा की तरफ से ये उम्मीद की जा रही है कि वह वर्ष 2030 तक एस्ट्रोनॉट्स को मंगल तक ले जाएगा.
कैसे होता है एस्ट्रोनॉट्स का बुनियादी प्रशिक्षण - उड़ान के लिए एस्ट्रोनॉट्स को सर्टिफाइ करने से पहले उम्मीदवारों को कई तरह के कठिन टास्क से गुजरना पड़ता है, जैसे स्पेसवॉक करना, रोबोटिक्स करना, हवाई जहाज उड़ाना और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में काम करना.
कैसे पास करते हैं चयन प्रक्रिया - सबसे पहले HR द्वारा प्रत्येक आवेदक की बुनियादी योग्यताओं की जांच की जाती है. समीक्षा करने वाले पैनल को एस्ट्रोनॉट रेटिंग पैनल कहते हैं, जिसमें 50 लोग शामिल होते हैं. हजारों उम्मीदवारों में से कुछ सौ उम्मीदवारों का चुनाव किया जाता है.