ज़िन्दगी के बदलते रूप

ज़िन्दगी के बदलते रूप

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Product Specifications

Publisher Vani Prakashan All Hindi books by Vani Prakashan
ISBN 9789386799463
Author: Sharad Gupt
Number of Pages 369
Available
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ज़िन्दगी के बदलते रूप - Page 1 ज़िन्दगी के बदलते रूप - Page 2 ज़िन्दगी के बदलते रूप - Page 3 ज़िन्दगी के बदलते रूप - Page 4 ज़िन्दगी के बदलते रूप - Page 5

 

‘ज़िंदगी के बदलते रूप’ पूर्व में प्रकाशित उपन्यास उजाले की तलाश और रूपा पब्लिकेशंस से When Faith Turned Red अनुवाद का सीक्वल है।ज़माना  सीक्वल का है। साहित्य इससे कैसे बच सकता है। उजाले की तलाश में कहने से जो रह गया था सीक्वल उसकी पूर्ति करता है। पूरक है उसका। उजाले की तलाश के प्रकाशन के बाद के सालों में हालात बद से बदतर होते चले गये हैं। लोक कल्याण की जगह राजनेता, हाईकमाण्ड एवं प्रधानमंत्री  के मौन समर्थन से राजनेता भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूब एवं स्व कल्याण में लग गये। नेहरू-गाँधी परिवार की तर्ज पर खानदानी राज कायम होने लगा। इसमें पार्टी चाटुकारों ने प्रमुख रोल निभाया। जिस विश्वास से गरीब जनता ने लोकमंगल के लिए सत्ता सौंपी थी उससे विश्वासघात किया गया। गारीबों को उनका हक दिलाने के वादे बेशर्मी से भुला दिये गये। राष्ट्रीय सम्पदा-स्पेक्ट्रम, कोयला, कच्चा लोहा से मिलने वाली रकम में खुले आम दलाली अरबों में खायी गयी। हाईकमाण्ड और प्राधानमंत्री के संरक्षण में चम्बल के लुटेरे डाकू राजनीति में पहुँच गये।